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नहाते समय करें इस मंत्र का जप

शास्त्रों में बताया गया है कि स्नान करते समय भी हमें मंत्रों का जाप करना चाहिए। नहाते समय करें इस मंत्र का जप।   

गंगे  यमुने चैव गोदावरी सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरी जलऽस्मिन्सन्निधिं कुरु।।

यदि व्यक्ति नदी में स्नान कर रहा है तो उसे पानी पर ऊँ लिखकर उसमें तुरंत डुबकी लगा देनी चाहिए। 


इस मंत्र की जप करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती हे।  इसके साथ ही पापों से भी मुक्ति मिलती थी।

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शीतला अष्टमी व्रत चैत्र कृष्णा पक्ष अष्टमी को मनाया जाता हे । निचे विस्तृत रूप में शीतला अष्टमी व्रत विधि पड़ सकता हे । 
सप्तमी के दिन  अष्टमी से पहले दिन यानी सप्तमी तिथि को शाम को सूर्य ढलने के पश्चात तेल और गुड़ में खाने-पीने की वस्तुएं मीठी रोटी, मीठे चावल, गुलगुले, बेसन एवं आलू आदि की नमकीन पूरियां तैयार की जाती हैं। 
अष्टमी के दिन  मां शीतला को अष्टमी के दिन मंदिर में जाकर गाय के कच्चे दूध की लस्सी के साथ सभी चीजों का भोग लगाया जाता है। मीठी रोटी के साथ दही और मक्खन, कच्चा दूध, भिगोए हुए काले चने, मूंग और मोठ आदि प्रसाद रूप में चढ़ाने की परम्परा है।  माता शीतला को भोग लगाने के बाद मंदिर में बनी विभिन्न पिंडियों पर भी कच्ची लस्सी चढ़ाई जाती है। 
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