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दूध उबल कर बाहर गिरना अच्छा नहीं हे हिन्दू धर्म के विश्वास

हिन्दू धर्म का मानना हे की दूध उबल कर बाहर गिरना नहीं चाहिए।  रसोई में अन्न की देवी अन्नपूर्णा और धन की देवी लक्ष्मी एकसाथ वास करती हैं। दूध से घर में सुख और संपन्नता देखी जाती है।

दूध उबल कर बाहर गिरने से व्यक्ति मनोविकास से पीड़ित हो सकता है।

व्यक्ति के पारिवारिक जीवन में उथल-पुथल की संभावना बढ़ती है।

रिश्तेदारों में मतभेद होते हैं।

पैसों का अक्समात खर्च होता है।

घर के लोग बीमार रहने लगते हैं और घरेलू जीवन में संधि विच्छेद की संभावना बढ़ती है।

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शीतला माता पूजा विधि - शीतला अष्टमी व्रत विधि

शीतला अष्टमी व्रत चैत्र कृष्णा पक्ष अष्टमी को मनाया जाता हे । निचे विस्तृत रूप में शीतला अष्टमी व्रत विधि पड़ सकता हे । 
सप्तमी के दिन  अष्टमी से पहले दिन यानी सप्तमी तिथि को शाम को सूर्य ढलने के पश्चात तेल और गुड़ में खाने-पीने की वस्तुएं मीठी रोटी, मीठे चावल, गुलगुले, बेसन एवं आलू आदि की नमकीन पूरियां तैयार की जाती हैं। 
अष्टमी के दिन  मां शीतला को अष्टमी के दिन मंदिर में जाकर गाय के कच्चे दूध की लस्सी के साथ सभी चीजों का भोग लगाया जाता है। मीठी रोटी के साथ दही और मक्खन, कच्चा दूध, भिगोए हुए काले चने, मूंग और मोठ आदि प्रसाद रूप में चढ़ाने की परम्परा है।  माता शीतला को भोग लगाने के बाद मंदिर में बनी विभिन्न पिंडियों पर भी कच्ची लस्सी चढ़ाई जाती है। 
लस्सी शिव को चढ़ाना चाहिये  भगवान शिव के मंदिर में शिवलिंग पर कच्ची लस्सी चढ़ाकर मां से परिवार के मंगल की कामना के लिए प्रार्थना की जाती है। 
शीतला अष्टमी व्रत और कंचक पूजन 
वैसे तो हिन्दुओं के प्रत्येक धार्मिक आयोजन पर कंजक पूजन की परम्परा है परंतु नवरात्रों में इसका विशेष महत्व है। चैत्र मास की शीतला अष्टमी पर मां के पूजन के साथ …