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सावन सोमवार व्रत कथा - श्रावण सोमवार को पड़ने वाला व्रत कथा

हिन्दू पुराणों और धर्मग्रंथों में भगवान शिव की पूजा के लिए सावन के महीना अत्याधिक महत्व है। श्रावण महीने में देवी पार्वती ने शिव की घोर तपस्या की थी और शिव ने उन्हें दर्शन भी इसी माह में दिए थे। सवान सोमवार व्रत कथा निचे पढ़िए।

भगवान शंकर ने स्वयं सनतकुमारों को सावन महीने की महिमा बताई है।

बारह महीनों में विशेष है श्रावण मास, इसमें शिव की पूजा करने से प्रायः सभी देवताओं की पूजा का फल मिल जाता है।

 श्रावण सोमवार को पड़ने वाला व्रत कथा

सवान सोमवार व्रत कथा 

एक बार सावन के महीने में अनेक ऋषि क्षिप्रा नदी में स्नान कर उज्जैन के महाकाल शिव की अर्चना करने हेतु एकत्र हुए।

वहां अभिमानी वेश्या भी अपने कुत्सित विचारों से ऋषियों को धर्मभ्रष्ट करने चल पड़ी।

किंतु वहां पहुंचने पर ऋषियों के तपबल के प्रभाव से उसके शरीर की सुगंध लुप्त हो गई। वह आश्चर्यचकित होकर अपने शरीर को देखने लगी। उसे लगा, उसका सौंदर्य भी नष्ट हो गया।

उसकी बुद्धि परिवर्तित हो गई। उसका मन विषयों से हट गया और भक्ति मार्ग पर बढ़ने लगा।

 उसने अपने पापों के प्रायश्चित हेतु ऋषियों से उपाय पूछा, वे बोले- ‘तुमने सोलह श्रृंगारों के बल पर अनेक लोगों का धर्मभ्रष्ट किया, इस पाप से बचने के लिए तुम सावन सोमवार व्रत करो और काशी में निवास करके भगवान शिव का पूजन करो।

वेश्या ने ऐसा ही किया और अपने पापों का प्रायश्चित कर शिवलोक पहुंची।

ऐसा माना जाता है कि सावन सोमवार के व्रत से कन्याओं को सुंदर पति मिलते हैं तथा पुरुषों को सुंदर पत्नि की प्राप्ति होती है।