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प्रदोष व्रत उद्यापन

शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत को 21 वर्ष तक करने का विधान है। अगर आप चाहते हो तो 11 या 26 प्रदोष व्रत रखकर भी इसका उद्यापन किया जा सकता है।

उद्यापन के दिन गणेश जी के साथ शिवा पारवती  पूजन करना चाहिए।

उत्तर दिशा की ओर मुख करके प्रदोष व्रत उद्यापन करना चाहिए।

प्रदोष काल में शिव पूजन के बाद ही भोजन ग्रहण करें।



सूर्यास्त के 15 मिनट पहले स्नान कर सफ़ेद वस्त्र पहनकर शिवलिंग को शुद्ध जल से फिर पंचामृत से स्नान करवाएं।

इसके बाद दोबारा शुद्ध जल से स्नान कराकर, वस्त्र, यज्ञोपवीत, चंदन, अक्षत, इत्र, अबीर-गुलाल अर्पित करें।

मंदार, धतूरा या गुलाब के फूल व बेलपत्र चढ़ाएं।

इसके बाद धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल व दक्षिणा चढ़ाकर आरती करें।

ॐ उमामहेश्वराभ्यां नम: मंत्र का जप करें।  मंत्र जप करते अग्नि में गाय के दूध से बनी खीर की 108 आहुति देकर हवन करें।